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Thursday, December 22, 2011

इंटेल : 2012 अल्ट्राबुक्स का


इंटेल ने 2012 के लिए टेक्नॉलजी ट्रेंड का अनुमान दिया है। इनमें सबसे अहम है लैपटॉप की नई जेनरेशन अल्ट्राबुक्स। इंटेल का कहना है कि अगले साल तक ज्यादातर लैपटॉप अल्ट्राबुक्स ही होंगे और 2013 तक ये पुरानी नोटबुक्स को पूरी तरह रिप्लेस कर देंगे। अल्ट्राबुक बेहद स्लिम और कम वजन के लैपटॉप होते हैं जो बैटरी कम खाते हैं और परफॉर्मेंस भी सुपर फास्ट होती है।

अल्ट्राबुक्स अगले तीन साल में तीन फेज में आएंगी। हर फेज में इनमें टच, ज्यादा लंबी बैटरी और स्लिम डिजाइन के नए फीचर जुड़ते जाएंगे। भारत में अभी आसुस और लेनोवो ने अपनी अल्ट्राबुक्स लॉन्च कर दी हैं, ऐसर और तोशिबा समेत तमाम बड़ी कंपनियां भी इस पर बड़ा दांव लगा रही हैं। इंटेल के डायरेक्टर मार्केटिंग (साउथ एशिया) संदीप अरोरा का कहना है कि सस्ती टैबलेट्स आने के साथ देश में कंप्यूटिंग की तरफ लोगों का चलन बढ़ेगा। टैबलेट के आने से नेटबुक पर पड़ने वाले असर के बारे में उनका कहना था कि दोनों कैटिगरी की अपनी जगह बनी रहेगी। गौरतलब है कि अधिकतर टैबलेट्स इंटेल के एटम प्रोसेसर पर ही चलती हैं।

गूगल की टैबलेट
गूगल के चेयरमैन एरिक श्मित ने संकेत दिए हैं कि उनकी कंपनी 6-8 महीने के अंदर अपनी टैबलेट ला सकती है। एपल और गूगल के बीच रही जंग में यह नया एंगल होगा। गूगल ने अपने मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम एंड्रॉयड से आई फोन को कड़ी टक्कर देने की कोशिश की है, अब उसके निशाने पर आई पैड का बाजार है। सैमसंग की गैलेक्सी टैबलेट अभी तक इसका बाजार काटने में नाकाम रही है। श्मित ने इटली के एक अखबार को दिए इंटरव्यू में इस बात के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि अगले छह महीने में हम बाजार में बहुत अच्छी क्वॉलिटी की टैबलेट लाने का प्लान बना रहे हैं।

आइसक्रीम सैंडविच अपग्रेड
सैमसंग गैलेक्सी नोट और गैलेक्सी एस-2 फोन इस्तेमाल करने वालों के लिए अच्छी खबर है। इन दोनों हैंडसेट को आइसक्रीम सैंडविच (एंड्रॉयड 4.0) का अपग्रेड मिलेगा। बहुत दिनों से इस बारे में कयास चल रहे थे कि किन हैंडसेटों पर ऑपरेटिंग सिस्टम अपग्रेड आएगा। अगले साल इसकी शुरुआत होगी और बाद में इसे अन्य गैलेक्सी डिवाइस के लिए भी ऑफर किया जाएगा। गैलेक्सी आर, गैलेक्सी टैब 7, टैब 10.1, 8.9, 7.7 के लिए भी बाद में अपग्रेड आने की खबर है, हालांकि गैलेक्सी वाई और गैलेक्सी ऐस के बारे में कुछ नहीं कहा गया है। आइसक्रीम सैंडविच से बेहतर मल्टीटास्किंग, एनएफसी, फेस अनलॉक जैसे फीचर मिलेंगे।
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कंप्यूटर बना विदेशी भाषाओं का ट्यूटर


विदेशी भाषाएं सीखना चाहते हैं तो इंटरनेट पर कई ऐसी वेबसाइट हैं जो आपके लिए मददगार हो सकती हैं। अच्छी बात यह है कि इनके लिए कोई फीस भी नहीं देनी है। ऐसी वेबसाइट्स की पूरी जानकारी दे रहे हैं बालेंदु शर्मा दाधीच :

नेट पर विदेशी भाषाएं सीखने के तीन तरह के ठिकाने हैं- पहले वे कारोबारी संस्थान जो एक तय फीस लेकर विदेशी भाषा सिखाते हैं, जैसे रोजेटा स्टोन (rosettastone.com) और बुसु (busuu.com) । इन्हें पूरी तरह प्रफेशनल तरीके से विकसित किया गया है। अगर आप उनके टाइम-टेबल का पालन करते हुए आगे बढ़ते हैं तो कुछ हफ्ते में ही विदेशी भाषा बोलने-समझने लगेंगे। दूसरी वेबसाइट्स वे हैं, जिन्हें ऐसी यूनिवर्सिटी, इंटरनेट कंपनियों, मीडिया कंपनियों आदि ने विकसित किया है जिनके लिए भाषा शिक्षण का कोई कारोबारी मकसद नहीं है।

बीबीसी, अबाउट. कॉम, मोनाश यूनिवर्सिटी वगैरह इसी कैटिगरी में आते हैं। यहां भी प्रफेशनल तरीके से भाषाएं सिखाई जाती हैं। तीसरी तरह के ठिकाने ऐसे हैं जिन्हें उत्साही युवाओं, भाषा-प्रेमियों, पर्यटन-प्रेमियों, धार्मिक संस्थानों ने तैयार किया है। इनमें अच्छी सामग्री है, लेकिन वह सही ढंग से ऑर्गनाइज नहीं होती। यहां हम कुछ फ्री रिसोर्स की चर्चा करेंगे।

बीबीसी लैंग्वेजेज (bbc.co.uk/languages)
- ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन की वेबसाइट पर फ्रेंच, स्पैनिश, जर्मन, ग्रीक, चीनी, पुर्तगाली, इटैलियन, रशन आदि भाषाओं को सीखने के अच्छे सेक्शन हैं।

- बीबीसी न सिर्फ इन भाषाओं में ऑडियो और विडियो कोर्स उपलब्ध कराता है, बल्कि 12 हफ्ते में आपको इन भाषाओं में सक्षम बनाने का प्रोग्राम भी चलाता है जिसके आखिर में बाकायदा सर्टिफिकेट दिया जाता है।

- यहां के इनोवेटिव तौर-तरीके नई भाषा के प्रति जिज्ञासा और दिलचस्पी बनाए रखते हैं। मिसाल के तौर पर विदेशी भाषाओं में होने वाले मजेदार प्रयोगों, नए लोगों की गलतियों और टंग-ट्विस्टर्स (ऐसे शब्द जिनका उच्चारण विदेशियों के लिए मुश्किल है) का मजेदार डेटाबेस।

- बीबीसी पर 40 भाषाओं का छोटा कोर्स भी है, जिसे क्विक फिक्स कहा गया है।

- यूनाइटेड किंगडम की भाषाओं (गैलिक, वेल्श, आइरिश और इंग्लिश) को सीखना चाहें तो शायद यह सबसे अच्छे रिसोर्सेज में से एक है।

- लैंग्वेज कोर्स के साथ-साथ अपने भाषा ज्ञान को आजमाने की सुविधा, उस भाषा के रेडियो-टीवी का आनंद लेने की सुविधा, ऑनलाइन शब्दकोश, संबंधित देश व भाषा के बारे में उपयोगी गाइड (वर्णमाला, तथ्य, वाक्य आदि का संकलन), लेख, क्विज, अपने आसपास क्लास के बारे में जानकारी पाने की सुविधा और ईमेल टिप्स आदि इस कोर्स को और उपयोगी बना देते हैं।

अबाउट.कॉम डिस्टेंस लर्निंग (tinyurl.com/ye685qo)
- अबाउट.कॉम की वेबसाइट अगर दुनिया के हर अहम मुद्दे पर जानकारियों का खजाना है तो उसके फ्री डिस्टेंस लर्निंग प्रोग्राम फ्रेंच, जर्मन, इटैलियन, जापानी, मंदारिन, चीनी, स्पैनिश और अंग्रेजी सीखने का बेहतरीन जरिया भी हैं।

- इस पेज पर न सिर्फ इस वेबसाइट के लैंग्वेज लर्निंग प्रोग्राम्स के बारे में जानकारी है, बल्कि इंटरनेट पर मौजूद दूसरे लैंग्वेज लर्निंग ठिकानों के उपयोगी लिंक्स भी दिखेंगे।

- किसी भी भाषा के सेक्शन में जाने पर पांच टैब्स दिखाई देते हैं - लेटेस्ट, स्टार्ट लर्निंग, प्रैक्टिस/परफेक्ट, फॉर टीचर्स और ब्राउज ऑल।

- पहले सेक्शन में उस भाषा से जुड़ी ताजातरीन घटनाओं, मुद्दों वगैरह की जानकारी हैं तो स्टार्ट लर्निंग सेक्शन में स्टूडेंट्स के लिए रिसोर्सेज का खजाना है।

- शुरुआत भाषा के परिचय से होती है और फिर व्याकरण, उच्चारण, स्पेलिंग, शब्द-ज्ञान, प्रैक्टिस, सलाह, सीखने में मदद करने वाले टूल्स वगैरह से जुड़े लिंक्स दिखाई देते हैं।

- टेक्स्ट के साथ-साथ ऑडियो, विडियो और इंटरएक्टिव एलिमेंट इसे उपयोगी बनाते हैं।

- उच्चारण पर अलग से अच्छा-खासा सेक्शन है, जो फ्रेंच, चीनी जैसी भाषाओं के लिहाज से अहम हो जाता है। नई भाषा सीखने वाले लोगों के लिए बोलने के साथ-साथ सुनना भी जरूरी होता है। लिसनिंग एक्सरसाइज इस जरूरत को पूरा करते हैं। तसल्ली से लोगों की बातचीत सुनिए और देखिए कि कौन-सा शब्द किस अंदाज में बोला जाता है।

लाइव मोका (livemocha.com)

- हिंदी समेत लगभग तीन दर्जन भाषाएं सिखाने वाली यह वेबसाइट फ्री और पेड दोनों तरह के कोर्स चलाती है।

- पेड कोर्सों के लिए 10 से 25 डॉलर तक की फीस ली जाती है लेकिन अगर आप नई भाषा सीखने की शुरुआत कर रहे हैं तो इसका बेसिक कोर्स ले सकते हैं जो पूरी तरह फ्री है।

- अंग्रेजी, स्पैनिश, पुर्तगाली, फ्रेंच, जर्मन, इटैलियन, चीनी, जापानी, रूसी भाषाओं में लाइव मोका के लैंग्वेज प्रोग्राम काफी कारगर माने जाते हैं।

- इस साइट की खास बात है अपने सदस्यों को आपस में संपर्क करने के लिए बढ़ावा देना, जिससे वे एक-दूसरे के ज्ञान का फायदा उठा सकें। काफी हद तक कम्यूनिटी लर्निंग की तरह।

- करीब 1 करोड़ 10 लाख लोग इससे जुड़े हैं। यहां पढ़ाई करने के लिए सबसे पहले एक अकाउंट बनाना होता है। फिर सीखने वाली भाषा व पढ़ाई का स्तर चुनिए और सिलसिलेवार इंटरएक्टिव लेसंस पढ़ना शुरू कर दीजिए।

इन्हें भी आजमाइए

internetpolyglot.com
यहां 30 से ज्यादा विदेशी भाषाएं सिखाई जाती हैं। ज्यादातर पढ़ाई-लिखाई फ्री है। यहां फ्लैश कार्ड तकनीक पर ज्यादा जोर है।

elanguageschool.net
अरबी, फिनिश, हिंदी, रूसी और 10 दूसरी भाषाओं को सिखाने वाली वेबसाइट जहां ऑडियो, विडियो और इंटरएक्टिविटी का इस्तेमाल हुआ है।

palabea.com
यह एक सोशल नेटवर्किंग साइट है, जिसका फोकस विदेशी भाषाओं को पढ़ना-पढ़ाना, अभ्यास करना और दूसरों से बातचीत करना है।

italki.com
सौ से ज्यादा भाषाएं बोलने वाले 200 से ज्यादा देशों के लोग इसके सदस्य हैं। यह ऑनलाइन लर्निंग कम्यूनिटी और मार्केट प्लेस है, जहां लोग एक-दूसरे को सहयोग करते हैं। यहां भाषाएं सीखने में कारगर कई तरह के रिसोर्स भी उपलब्ध हैं।
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Wednesday, December 21, 2011

टेलीविजन जगत में आने वाली है बड़ी क्रांति


आपने एक से बढ़कर एक टेलीवजन देखे होंगे लेकिन जिस टीवी की हम बात कर रहे हैं, वैसा आपने शायद ही देखा-सुना होगा।
यह टीवी बना रहे हैं ब्रिटेन के वैज्ञानिक और उन्होंने एक ऐसा टीवी स्क्रीन बना लेने में सफलता हासिल कर ली है जो मोड़कर जेब में रखा जा सकता है। यह टेक्नोलॉजी मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी में विकसित हुई है। शोधकर्ताओं ने प्रकाश छोड़ने वाले क्रिस्टल्स विकसित कर ली है जिसका इस्तेमाल अल्ट्रा थिन टीवी बनाने में होगा।

मॉर्निंग हेरल्ड नाम के अखबार के मुताबिक इन महीन क्रिस्टल्स को क्वांटम डॉट्स कहा जाता है। इनसे ही कागज की तरह पतले लेकिन विशाल टेलीविजन सेट्स बनाए जा सकेंगे।

रिसर्चकर्ता इस तकनीक को बेचने के लिए सोनी, सामसुंग और एलजी जैसी कंपनियों से बातचीत कर रहे हैं। जल्दी ही यह टेलीविजन बाज़ार में उतर जाएगा।

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